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कॉफी में मिलाएं एक चुटकी हल्दी, वेट लॉस से लेकर ग्लोइंग स्किन तक, आपको मिलेंगे फायदे...

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कॉफी में मिलाएं एक चुटकी हल्दी, वेट लॉस से लेकर ग्लोइंग स्किन तक, आपको मिलेंगे फायदे... हल्दी कॉफी एक हेल्थ फोकस्ड पेय पदार्थ है, जिसे कॉफी के स्ट्रांग फ्लेवर और हल्दी के औषधीय गुणों को मिलाकर तैयार किया जाता है। करक्यूमिन का सेवन शरीर के वजन को कम करता है। वहीं कैफीन शरीर की चर्बी घटाने में मदद करती है। कॉफी का स्वाद को महक हर किसी को लुभाती है। इसी के चलते अधिकतर लोग दिन की शुरूआत चाय की जगह कॉफी की एक प्याली से करते हैं। इसे पीने के बाद लोग खुद को एक्टिव और एनर्जी से भरपूर महसूस करने लगते हैं। अगर आपकी गिनती भी उन लोगों में होती है, जो कॉफी लवर हैं, तो इस बात चुटकी भर हल्दी को मिलाकर इसे और भी पौष्टिक बनाया जा सकता है। करक्यूमित कंपाउड से भरपूर हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी.इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। इसे जब कॉफी के साथ मिलाया जाता है तो एके पावरफुल कॉम्बीनेशन तैयार हो जाता है। इन दो सुपरफूड्स को मिलाकर से शरीर को कई लाभ मिलते हैं। अगर आप वेटलॉस जर्नी पर है, तो ये पेय पदार्थ आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। हल्दी कॉफी एक हेल्थ फोकस्ड पेय पदार्थ है, जिसे कॉफी के स्...

चकली का इतिहास

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चकली एक लोकप्रिय भारतीय नाश्ता है जिसकी उत्पत्ति भारत के पश्चिमी भाग, विशेष रूप से महाराष्ट्र और गुजरात में हुई थी। चकली का इतिहास : चकली की उत्पत्ति मराठा साम्राज्य (1674-1818) के समय से हुई है। ऐसा माना जाता है कि इसे मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज के रसोइयों ने बनाया था। चकली कारखानों का विकास : शुरू में चकली घर पर या छोटी-छोटी स्थानीय दुकानों में बनाई जाती थी। जैसे-जैसे मांग बढ़ी, उद्यमियों ने बड़े पैमाने पर चकली बनाने के लिए समर्पित कारखाने स्थापित करना शुरू कर दिया। मुंबई का कनेक्शन : महाराष्ट्र का एक प्रमुख शहर होने के नाते मुंबई चकली उत्पादन का केंद्र बन गया। शहर की चकली फैक्ट्रियों की संख्या और आकार में वृद्धि हुई, स्थानीय मांग को पूरा किया और अंततः भारत के अन्य हिस्सों और विदेशों में निर्यात किया।   मुख्य मील के पत्थर : 1. 19वीं सदी के अंत में: चकली उत्पादन घर-आधारित से छोटे पैमाने की औद्योगिक इकाइयों में स्थानांतरित हो गया। 2. 20वीं सदी के मध्य में: मशीनीकरण शुरू हुआ, जिससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई। 3 . 1980-90 के दशक: चकली कारखानों का विस्तार हुआ, ज...

शानदार सनातन घड़ी...

शानदार सनातन घड़ी, जिसके बारे में बहुत से सनातनियों को जानकारी नहीं होगी।  समय दर्शाने वाले अंकों के साथ लिखे गए नामों पर गौर करें...   12:00 आदित्य-सूर्य-12 आदित्य।   1:00     ईश्वर-केवल एक ईश्वर- "एको ब्रह्मा द्वितीयो नास्ति"।   2:00     पक्ष-2 प्रकार-  शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष.   3:00      अनादि तत्व-3 प्रकार-परमात्मा, जीवात्मा और प्रकृति।   4:00      वेद-4 प्रकार- ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद।   5:00     महाभूत-5 प्रकार-सत्वगुण, रजोगुण, कर्म, काल, स्वभाव।   6:00      दर्शन-6 प्रकार-सांख्य, योग, न्याय, वैशेषिक, मीमांसा और वेदांत।   7:00      धातु-7 प्रकार- रस (प्लाज्मा), रक्त (रक्त), माँस (ऊतक और मांसपेशियाँ), मेद (वसा), अस्ति (हड्डियाँ), मज्जा (अस्थि मज्जा), और शुक्र (प्रजनन ऊतक)।   8:00    अष्टांग योग - 8 प्रकार - यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारण, ध्यान और समाधि।   9:00 अंक-अंक-9  प्रकार...