रक्तचाप क्या है...
रक्तचाप क्या है ?...
हृदय, रक्त को धमनियों में पंप करके धमनियों में रक्त प्रवाह को विनियमित करता है और इसपर लगने वाले दबाव को ही रक्तचाप कहते हैं। किसी व्यक्ति का रक्तचाप, सिस्टोलिक/डायास्टोलिक रक्तचाप के रूप में अभिव्यक्त किया जाता है। जैसे कि 120/80 सिस्टोलिक अर्थात ऊपर की संख्या धमनियों में दाब को दर्शाती है।
हमारे शरीर में रक्त का प्रवाह एक निश्चित गति से होता है। यदि हेल्थ गाइडलाइंस या स्वास्थ्य निर्देशों की बात करें तो शरीर में रक्त का दबाव 120/80mmHg से अधिक नहीं होना चाहिए। यदि रक्त का दबाव या प्रवाह इस निश्चित सीमा को पार कर जाता है तो ऐसे में शरीर में उच्च रक्तचाप या हाइपरटेंशन की स्थिति पैदा हो जाती है।
रक्तचाप के कितने प्रकार होते हैं ?...
दो तरह के ब्लड प्रेशर होते हैं. एक होता है, सिस्टोलिक (Systolic) ब्लड प्रेशर और एक होता है डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर. अगर आम भाषा में समझें तो जिसे आप ऊपर का ब्लड प्रेशर कहते हैं वो है सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर. वहीं, जिसे लोग नीचे वाला ब्लड प्रेशर कहते हैं, वो डायस्टोलिक प्रेशर होता है.
निम्न रक्तचाप के लक्षण क्या है ?...
लक्षण - सामान्य तौर पर जब आप अचानक बेहद कमजोरी महसूस करें या चक्कर आने जैसे लक्षण निम्न रक्तचाप के हो सकते हैं। लेकिन प्रमुख रूप से थकान, डिप्रेशन, जी मचलाना, प्यास लगना, धुंधला दिखाई देना, त्वचा में पीलापन, शरीर ठंडा पड़ जाना, आधी-अधूरी और तेज सांसें आना आदि निम्न रक्तचाप के प्रमुख लक्षण हैं।
रक्तचाप का नियंत्रण कौन सी ग्रंथि करती है ?...
यदि शरीर में रक्तदाब कम होता है, तो एड्रिनल ग्रंथि से एड्रिनलिन हॉर्मोंस निकलता है, जो रक्तदाब को बढ़ाता है।
उच्च रक्तचाप में कौन सा अंग प्रभावित होता है ?...
उच्च रक्तचाप आपके गुर्दे तक जाने वाली बड़ी रक्त वाहिकाओं और आपके गुर्दे के अंदर छोटी वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती हैं। जिसके कारण गुर्दे सही तरह से काम नहीं कर पाते और व्यक्ति को किडनी संबंधी समस्याएं यहां तक कि किडनी फेल का भी सामना करना पड़ता है। उच्च रक्तचाप गुर्दे की विफलता के प्रमुख कारणों में से एक है।
बीपी कौन से हाथ से नापते हैं ?...
सामान्य तौर पर, ब्लड प्रेशर की रीडिंग हम अपने बाएं हाथ से नापते हैं और उसी के अनुसार अपनी रीडिंग नोट करते हैं। मगर कई शोध के अनुसार, यह पता चला है कि ब्लड प्रेशर की रीडिंग सिर्फ बाएं हाथ से नहीं बल्कि दाएं हाथ से भी लेनी चाहिए।
बाएं हाथ में ब्लड प्रेशर क्यों लेते हैं ?...
दूसरी ओर ब्लड प्रेशर ज्यादा होने से खून में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ सकती है, जो धमनियों में खून के आवागमन को रोकता है. इससे हार्ट में खून का बहाव कम हो सकता है. अगर बाये हाथ में बीपी बहुत ज्यादा है, तो इसका मतलब है कि धमनी (artery) में कोलेस्ट्रॉल बहुत ज्यादा हो गया है और यह धमनी को ब्लॉकेज करने के लिए तैयार है.
ब्लड प्रेशर और बीपी में क्या अंतर है ?...
वहीं इसके भी दो प्रकार के लक्षण होते हैं हाई ब्लड प्रेशर और लो ब्लड प्रेशर। इसलिए इनमें अंतर जानने कि आपको बेहद आवश्य्कता होती है। लो ब्लड प्रेशर कि स्थति में दिल की गति में औसत मानक से कम ब्लड का प्रवाह होता है, वहीं लो बीपी होने पर व्यक्ति का बीपी में सिस्टोलिक 90 mm Hg से कम औरडायास्टोलिक 60 mm Hg से कम होता है।
बीपी क्या है समझाइए ?...
इसलिए, हम यह परिभाषित कर सकते हैं कि ब्लड प्रेशर वह दबाव या प्रेशर है जिसमें शरीर के चारों ओर ब्लड को हृदय के द्वारा पंप किया जाता है। यदि ब्लड प्रेशर ज्यादा या हाई होता है तो धमनियों या हृदय पर अतिरिक्त तनाव उत्पन्न होता है और हृदय का दौरा भी पड़ सकता है. इसलिए, ब्लड प्रेशर को सामान्य बनाए रखना बहुत आवश्यक है.
चाय पीने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है क्या ?...
यह पोटैशियम आयन को भी बदल देते हैं. इस प्रकार चाय हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर को कम करने और दिल से जुड़ी काफी सारी बीमारियों जैसे हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर को कम करने में सहायक है.
ब्लड प्रेशर कब चेक करना चाहिए ?...
भर पेट खाने के 2 घंटे बाद ही चेकअप करें। नापने से पहले कम से कम 5 मिनट कुर्सी पर बैठकर रिलैक्स करें। कई डिजिटल मशीनें अलग-अलग रीडिंग दिखाती हैं। इसलिए, अपने लिए सही ब्लड प्रेशर रीडर मशीन ही खरीदें और खरीदते वक्त डॉक्टर कि सलाह जरूर लें।
नीचे का बीपी क्यों बढ़ता है ?...
आर्टरीज और हार्ट पर ज्यादा दबाव पड़ने के कारण ब्लड प्रेशर हाई हो जाता है। यही नहीं, हार्ट रेट बढ़ने, हार्मोनल बदलाव, एनवाॅयरमेंटल बदलाव, डाइटरी हैबिट, नमक ज्यादा खाने और बहुत ज्यादा इमोशनल होने से भी ब्लड प्रेशर बढ़ता है। ज्यादा गुस्सा करने पर ब्रेन में एंड्रीनल हॉर्मोन बढ़ता है। यह हॉर्मोन बढ़ने से गुस्सा तेज होता है।
हाई ब्लड प्रेशर में क्या परहेज करना चाहिए ?...
* उच्च रक्तचाप के रोगी को ज्यादा मात्रा में भोजन नहीं करना चाहिए, साथ ही गरिष्ठ भोजन से भी परहेज करना चाहिए। * भोजन में फलों और सब्जियों के सेवन ज्यादा करना चाहिए। * लहसुन, प्याज, साबुत अन्न, सोयाबीन का सेवन करना चाहिए। * सब्जियों में लौकी, नींबू, तोरई, पुदीना, परवल, सहिजना, कद्दू, टिण्डा, करेला आदि का सेवन करना चाहिए।
40 साल की उम्र में ब्लड प्रेशर कितना होना चाहिए ?...
इसके अलावा, साल 31 से 35 के लोगों का SBP 114.5 और DBP 75.5 होना चाहिए। जबकि 36 से 40 साल के पुरुषों का SBP 120.5 mm Hg और DBP 75.5 होता है। इसके अलावा, 41-45 आयुवर्ग के मर्दों का नॉर्मल सिस्टोलिक बीपी लेवल 115.5 mm Hg और नीचे वाला नंबर 78.5 mm Hg होना चाहिए।
क्या हाई बीपी को जड़ से खत्म किया जा सकता है ?...
ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखने के लिए लगातार अनुलोम विलोम का अभ्यास किया जा सकता है। भ्रामरी प्राणायाम (bhramari pranayama): ब्लड प्रेशर को जड़ से खत्म करने में भ्रामरी प्राणायाम बेहद असरदार है। इसे करने से मरीज तनावमुक्त रहता है। इस प्राणायाम को रोजाना दोहराने से ब्लड प्रेशर.
ब्लड प्रेशर की सबसे अच्छी दवा कौन सी है ?...
आयुर्वेद में हाई बीपी को कंट्रोल करने के लिए सबसे अच्छी दवा हैं दालचीनी, इसका प्रयोग मसाले के रूप में भी किया जाता हैं. दालचीनी केवल इंसान को दिल की बीमारियों से ही नहीं बल्कि डायबटीज से भी बचाता हैं. इसके प्रयोग से शरीर में एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा बढ़ जाती हैं और ब्लड शुगर की कम.
बीपी की दवा खाने से क्या नुकसान होता है ?...
लंबे समय तक बीपी की दवाएं लेने से उनका साइड इफेक्ट्स (सिर दर्द, पैरों में सूजन, हार्ट रेट बढ़ना, खांसी आदि) हो सकते हैं। ऐसा कुछ हो तो अपने डॉक्टर को बताएं। डॉक्टर जरूरत के मुताबिक दवा बदल देंगे। लोग बिना डॉक्टर की सलाह खुद ही दवाएं बंद कर देते हैं, जबकि बीपी के लिए मरीजों को अक्सर जिंदगी भर दवाएं खानी होती हैं।
कौन सा फल खाने से बीपी कम होता है ?...
कीवी | Kiwi. हाई ब्लड प्रेशर के मरीज को कीवी को फल के रूप में जरूर शामिल करना चाहिए
तरबूज | Watermelon.
स्ट्रॉबेरी | Strawberry.
केला | Banana.
शकरकंद | Sweet potato.
दही भी है जरूरी
चावल खाने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है क्या ?...
सफेद चावल खाने से ग्लूकोज का लेवल हाई होता है जिससे ब्लड प्रेशर भी हाई हो जाता है. इसलिए ब्लड प्रेशर के मरीज को ब्राउन राइस खाने की सलाह दी जाती है.
क्या दूध पीने से बीपी बढ़ता है ?...
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हाई ब्लड प्रेशर में दूध पी सकते हैं क्योंकि, दूध में बायोएक्टिव पेप्टाइड्स होते हैं जो हाई बीपी को कम करने में मदद करते हैं. इसमें कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम और विटामिन ए, डी और प्रोटीन भी होता है. दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स में मौजूद पोषक तत्व ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद करते हैं.
हाई ब्लड प्रेशर में कौन सा नमक खाना चाहिए ?...
ऐसे में हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को नियंत्रित करने के लिए सेंधा नमक का सेवन फायदेमंद हो सकता है। हाई ब्लड प्रेशर के मरीज ज़िंक, पोटेशियम, कॉपर, सोडियम और कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों से युक्त रॉक साल्ट को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं।
बीपी हाई होने पर घरेलू उपचार क्या करें ?...
# अपने सोडियम सेवन को कम करें ...
# शराब कम पीना ...
# व्यायाम और कसरत ...
# कैफीन का सेवन कम करें ...
# अधिक पोटैशियम युक्त भोजन खाएं ...
# तनाव को मैनेज करें ...
# जामुन खाएं.
हाई ब्लड प्रेशर में अंडा खाना चाहिए या नहीं ?...
वयस्कों में सिस्टोलिक और डायस्टोलिक रक्तचाप पर अंडे के सेवन का कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ता है
हाई ब्लड प्रेशर में मछली खाना चाहिए या नहीं ?...
हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर मैकरेल मछली हाइपरटेंशन में काफी फायदेमंद साबित होती है। दिल की बीमारियों से बचाने में सहायक मैकरेल मछली में न केवल मोनो अनसैचुरेटेड फैटी एसिड होता है बल्कि पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड भी पाया जाता है।
हाई ब्लड प्रेशर में सेब खाना चाहिए ?...
खासकर, डायबिटीज और उच्च रक्तचाप के लिए तो सेब दवा समान है। इसमें पोटेशियम और फ्लेवोनोइड्स जैसे आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर में फायदेमंद साबित होते हैं। इसके रोजाना सेवन से ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखा जा सकता है।
ब्लड प्रेशर में तुलसी ?...
तुलसी में पाए जाने वाला वोलेटाइल तेल ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में भी मदद कर सकते हैं. तुलसी में पाया जाने वाला रासायनिक यूजेनॉल ब्लड वाली नसों को रोकने और ब्लॉक करने वाले पदार्थों को कम करने में मदद कर सकता है. अगर ब्लड वाली नसों में ब्लॉकेज नहीं होगा तो ब्लड अच्छी तरह से सर्कुलेट होगा.
??? क्यों मनाया जाता है विश्व उच्च रक्तचाप दिवस, जानें इसका महत्व...
ग़लत खानपान के चलते हाइपरटेंशन की समस्या लोगों को होने लगती है। लोगों में हाइपरटेंशन के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए ये दिन मनाया जाता है।
हर साल 17 मई को दुनियाभर में 'विश्व उच्च रक्तचाप दिवस' यानी World Hypertension Day मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देशय उच्च रक्तचाप के बारे में जागरूकता फैलाना और लोगों को इस साइलेंट किलर को नियंत्रित करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
जागरूकता की कमी...
उच्च रक्तचाप एक साइलेंट किलर है क्योंकि ज्यादातर लोगों में इसका कोई बाहरी लक्षण और लक्षण नहीं दिखता। नियमित सिरदर्द, सांस की तकलीफ, चक्कर आना, त्वचा का फड़कना और प्रतिकूल स्थितियों में नाक बहना कुछ ऐसे मामूली लक्षण हैं, जिन पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता और ऐसे यह अनियंत्रित और अनुपचारित रह जाता है। पीएलओएस मेडिसिन के एक हालिया अध्ययन के अनुसार, उच्च रक्तचाप की बढ़ती प्रवृत्ति के बावजूद, निदान और उपचार बहुत कम है। उच्च रक्तचाप से पीड़ित आधे से अधिक व्यक्ति इससे अनजान हैं। भारत में उच्च रक्तचाप सभी मौतों का लगभग 10.8 फीसदी और विकलांगता से प्रभावित जीवन सालों में 4.6 फीसदी का हिस्सा रखता है। इन आंकड़ों के बावजूद यह आश्चर्य की बात है कि आम जनता के बीच इस स्थिति के बारे में बहुत कम जागरूकता क्यों है!
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